अस्तित्व विचारशील होने का अहसास

ये जीवन के अनुभव, विचार, दर्शन और कभी-कभी कहानी के तौर पर अभिव्यक्ति है, बस...।

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प्रेम का ‘प्रिल्यूड’ है वसंत

Posted On: 13 Feb, 2013 Others,लोकल टिकेट में

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सर्दी की विदाई और गर्मी के आगमन का संदेश है वसंत… जीवन का, प्रेम का, सृजन का परिवेश रचता हुआ चुपके से आता है मौसम के आँगन में… सूखे पत्तों का झरना और नई कोंपलें आने का वक्त, पलाश, सरसों, महुआ और नीम के फूलने का मौसम, आम के बौराने और कोयल के पंचम सुर में गाने की ऋतु… भंवरों के हिंडोल
गाने … धूप के पीले, सुबह के सिंदूरी, आसमान के रंग-बिरंगी होने और शामों के सुरमई होने के दिन… मन के मयूर हो जाने और प्रेम में डूब जाने का मौका है वसंत। जिस तरह प्रेम विस्तार है भावनाओं का, उसी तरह वसंत विस्तार है जीवन के आनंद का। यौवन की ऋतु है ये… जीवन के आनंद का, प्रकृति के उत्सव का प्रतीक है वसंत…, कल्पना है, सौंदर्य, संगीत, सृजन… जो कुछ भी कोमल है, सुंदर है, मनभावन है वो सब कुछ है वसंत… ठीक वैसे, जैसे प्रेम। सिमटे तो दिले आशिक और फैले तो जमाना है की तर्ज पर एक साथ विराट और सूक्ष्म है वसंत और प्रेम भी। हमारी परंपरा में वसंत कामदेव की ऋतु मानी जाती है। कामदेव पौराणिक कथा में प्रेम के देवता है, जिन्होंने कैलाश पर तपस्यारत महादेव की तपस्या को भंग करने का दुस्साहस किया था। कहा जाता है कि जिस वक्त शिव ने अपने तीर से कामदेव के प्राण लिए थे, उस वक्त आम बौराया हुआ था। कामदेव की पत्नी रति की प्रार्थना पर शिव ने जीवन तो दिया, लेकिन शरीर नहीं दिया, तब से कामदेव अनंग कहलाए। प्रेम भी अनंग है और वसंत भी… शीत का वजूद है, सर्द और रूखी हवाएं, ठिठुरन… गर्मी का लक्षण है जलाती धूप, तीखी चुहचुहाती गर्मी… और बारिश…! उसे तो किसी शिनाख्त की जरूरत ही कहां है? कभी बूंदों में तो कभी झड़ी की शक्ल में, आसमान में चमकती बिजली और गरजते बादलों से अपने वजूद की घोषणा करती है। बस शरद और वसंत ही हैं जो अनंग हैं… भावना की तरह। मन में जगह पाए हुए प्रेम की तरह, जैसा सृष्टि का हर कोना घेरे वसंत है। इसे खिले फूलों, भंवरों की गुनगुन, कोयल की कूक और बयार से पहचानिए, आम पर आए बौर, पलाश, महुआ और नीम के फूलने से चिह्ने… वो हवा है, अहसास है, भावना है… प्रेम की तरह, संत वैलेंटाइन की कामना की तरह…। शीत का विस्तार और ग्रीष्म का मंगलाचार है वसंत, पतझड़ की ऊंगली थामे जब ऋतुओं के आंगन में कदम रखता है ऋतुराज… तो जैसे दिन शहनाई की फूंक-सा हल्का-फुल्का हो जाता है और रात ऊंगलियों के सितार के तारों को स्पर्श करने से उत्पन्ना होती ध्वनि की तरह सुरीली होती चली जाती है …। खुल आता है मन और जीवन… बह जाने को, डूब जाने को आतुर…। पीले-सूखे पत्तों की तरह झड़ चुका होता है शीत का विषाद और नई कोंपलों-सा फूट आता है ग्रीष्म का आल्हाद, हिंडोल के बजते ही मन चंचल हो उठता है… बस इसी विषाद और आल्हाद की संधि-रेखा पर ही कहीं खड़ा होता है प्रेम। विरह की चूनर को थामे हुए, मिलन की उम्मीद लगाए। यूं ही तो नहीं वसंत को मधुमास या मधुऋतु कहा जाता है। वसंत प्रेम की ऋतु है, सृजन की ऋतु है। हर तरफ रंग बिखरे होते हैं जीवन के, पीले, नारंगी, लाल, सफेद, गुलाबी, हरे और न जाने कौन-कौन से रंग से धरती श्रृंगारित होती है। हवाएं भरती है सांसों में आम के बौर, महुआ के फूल और निंबोली की मादक सुंगध…।
हर तरफ उत्सव का आलम हो तो फिर कैसे मन इस सबसे जुदा रह सकता है? प्रकृति उदात्त होती है इन दिनों और उन्मुक्त भी, आह्वान करती है स्वतंत्रता का… सारे बंधनों को खोल देने का। तभी तो वसंत की आमद, मन में, उपवन में और फिर जीवन में उमंग, उत्साह और मादकता का संचार करता है। वसंत मुक्ति का गान है… बयार की तरह सारे बंध खोल देने और बह जाने का आह्वान करता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रेम… प्रेम में होना वैसा है जैसे सारी दुनिया को जीत लिया गया हो… वसंत का मन भी वैसा ही होता है, जैसा प्रेमी का मन…। इतना उन्मुक्त, सृजनशील और आल्हाद से भरा है वसंत कि इसमें प्रेम, सृजन और जीवन के हर रंग उतरते हैं, उभरते हैं। जिस तरह प्रेम जीवन में सारे रसों का सार है, उसी तरह वसंत हमारे जीवन में रसवर्षा ही है। पतझड़-वसंत, आशा-निराशा, विध्वंस-सृजन… प्रेम-विरह, रूठना-मनाना, खुशी-दुख… बस यही जीवन है और इतना ही प्रेम भी। शीत और ग्रीष्म का संधिकाल है वसंत… प्रेम और आल्हाद की पूर्वपीठिका। हवाओं की नशीली गंध, बौराया आम और महुआ के फूलों की महक से होश खोते मन की ऋतु है वसंत।
वसंत उत्सव, आल्हाद और उल्लास की ऋतु है, चंचल है, प्रेम में डूबी हुई नायिका की तरह… घड़ी में आशा और घड़ी में निराशा के हिंडोले पर सवार… वासंती बयार में सरसराती पत्तियों की आहट से उमगती और झूमते फूलों के स्पर्श से सिहरती है नायिका। एक ही साथ प्रेम और आगे बढ़कर जीवन के रस से रिश्ता जोड़ती ये ऋतु नवसंवत् की पूर्वपीठिका है। वसंत जीवन की पूर्णता है, जगत के कार्य-व्यापार से आगे मन के विस्तार का उत्सव है वसंत… तभी तो मन से मन को जोड़ता है।ये कोई इत्तफाक नहीं है कि वसंत के विस्तार में ही फागुन भी सिमटता है, होली भी और प्रेम का पर्व वैलेंटाइन्स-डे भी। वसंत अपने पीले रंग की तरह शुद्ध है, प्रेम की भावना, सृजन की कामना और आनंद के आग्रह के साथ रंगता है प्रकृति को और रंगरेज प्रकृति रंगती है हमारे मनों को।
हमारी पौराणिक मान्यता है कि चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की एकम(प्रतिपदा) को सृष्टि का सृजन किया गया था। तो वसंत इस रंग-बिरंगी दुनिया के सृजन की पूर्वपीठिका है, वो सपना है, वो कल्पना, योजना, विचार है, जिसके आधार पर इस विराट सृष्टि का निर्माण किया गया है। हर रंग से इस सृष्टि को सजाया गया है, जिसमें सबसे गाढ़ा और सबसे आधारभूत रंग है प्रेम…। जो जीवन का, सृजन का और आनंद का रंग है। प्रेम वो भाव है, जिसमें सारी सृष्टि समाहित होती है। सारे रंग, रस और सौंदर्य प्रेम का उसी तरह हिस्सा हुआ करता है, जिस तरह वसंत में प्रकृति अपने खुलते-खिलते रंग और सौंदर्य में अवतरित हुआ करती है। प्रेम और वसंत दोनों ही हमें जीवन के असली रूप के दर्शन करवाते हैं। आशा-निराशा और मिलन-विरह, सुख-दुख के मेल से ही जीवन पूर्ण होता है। एक के बिना दूसरा आधा हुआ करता है, उसी तरह वसंत हमें प्रेम की सीख देता है और जीवन को पूर्ण बनाता है। न होकर होने की प्रतीति है प्रेम… इसीलिए वसंत का साथी है। उसका सहचर है, उसका हमसफर है, प्रतिध्वनि और प्रतिबिंब है। साथ-साथ चलते हैं प्रेम और वसंत, जीवन के स्याह-सफेद में रंगों का इंद्रधनुष ताने हुए आ गया है वसंत…।



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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 21, 2013

वाह……. ऋतुराज वसंत पर बहुत ही उम्दा आलेख आप ने प्रस्तुत किया है ! आप के इस गद्य में भी लय है या यों कहें कि अंतर्लय में शब्द-शब्द डूबा है ! बहुत-बहुत बधाई ! बेस्ट ब्लौगर बनने पर अतिरिक्त बधाई ! पुनश्च !! नीरव जी !!

allrounder के द्वारा
February 21, 2013

नमस्कार अमीता जी, बसंती प्रेम से रंगे आलेख और सप्ताह के श्रेष्ठ ब्लोगर चुने जाने पर हार्दिक बधाई आपको ….

aman kumar के द्वारा
February 21, 2013

आदरणीय अमिता जी, सादर नमस्कार ! एक सुन्दर रचना और “”‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ की हार्दिक शुभकामना!””

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    धन्यवाद :-)

yogi sarswat के द्वारा
February 19, 2013

प्रेम और बसंत एक दूसरे के पूरक है प्रकृति ही मानो प्यार का आमन्त्रण दे रही हो बसंत का वर्णन का इतना सारगर्भित तरीके से करने के लिए बधाई !! ब्लोग्गर ऑफ़ दी वीक बनने पर बहुत बहुत बधाई

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    दो बार शुक्रिया… :-)

Sushma Gupta के द्वारा
February 17, 2013

अमिता जी, आपके इस अनूठे ,सुन्दर ,सरस, एवं वासंतिक फुहारों के रस से सरोवार आलेख से वास्तव में ह्रदय तो स्वतः स्फूर्त होकर भीग गया है, आपसे यह प्रथम परिचय वसंत सा ही सुहाना है …इस सप्ताह की बेस्ट ब्लोगर चुने जाने पर आपको हार्दिक वधाई …मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है …

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    ये सिलसिला यूँ ही चलता रहे… :-)

rekhafbd के द्वारा
February 16, 2013

अमिता जी ,बहुत खूबसूरत रचना , बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    दोनों के लिए धन्यवाद

atharvavedamanoj के द्वारा
February 16, 2013

आदरणीय अमिता जी वसंत के सर्वांगी, समीचीन, सरस और सरल विश्लेषण करते इस आलेख को पढकर धन्य हो गया..बस एक बात खटकी और वह है एक लम्पट को संत की संज्ञा देना..आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगी|

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    हाहाहा…. आप दक्षिणपंथी लगते हैं। :-)

krishnashri के द्वारा
February 16, 2013

आदरणीय महोदया , सादर , बहुत सुन्दर ,पठनीय ,संग्रहणीय ललित निबन्ध , शुभकामना .

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    बहुत-बहुत-बहुत धन्यवाद

anilkumar के द्वारा
February 15, 2013

आदर्णीय अमीता जी , सादर अभिवादन । इतने सुन्दर लेख के लिए आपको किन शब्दों में बधाई दूं । बस माँ सरस्वती से यह प्रार्थना है , कि वह आप को नव पर नव स्वर दें ।

    amita neerav के द्वारा
    February 21, 2013

    आपकी प्रार्थना मेरे लिए दुआएँ है…. बस इसे ही बनाए रखे…. धन्यवाद

Santlal Karun के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीया अमिता जी, आज वसंत पंचमी के दिन सुबह-सुबह पत्नी ने इशारा करते हुए कहा, ” वो देखिए वो, आम में बौर…” और सुबह ही आम का बौरायापन दिख गया | और साँझ होते-होते जब जेजे का पट खोला तो आप के मन के वासंती फुहारों से सराबोर हो उठा हूँ | क्या खूब लिखा है आप ने– “धूप के पीले, सुबह के सिंदूरी, आसमान के रंग-बिरंगी होने और शामों के सुरमई होने के दिन… मन के मयूर हो जाने और प्रेम में डूब जाने का मौका है वसंत। जिस तरह प्रेम विस्तार है भावनाओं का, उसी तरह वसंत विस्तार है जीवन के आनंद का।” xxx “हवाओं की नशीली गंध, बौराया आम और महुआ के फूलों की महक से होश खोते मन की ऋतु है वसंत।” लहर-से बल खाते अभिव्यंजित विचारों वाले साफ़-सुथरे, स्वस्थ-सुन्दर आलेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक ‘ के लिए हृदयपूर्वक बधाई !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीय अमिता जी, सादर ! एक सुन्दर रचना और “”‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ की हार्दिक शुभकामना!”"

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीय नीरव जी सादर मेरा कमेन्ट तो दिखा नहीं. ख़ैर डबल बधाई

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    आपकी शुभेच्छा ही आपका कमेंट हैं… :-)

omdikshit के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीया अमिता जी, शुभ-वसंत. वास्तव में अब तक के समस्त ब्लाग में सर्व-श्रेष्ठ और ‘बेस्ट-ब्लाग’ के लिए सर्वथा उपयुक्त.लेखन -शैली भी उत्कृष्ट,बार-बार पढ़ने पर भी बार-बार पढने को मन करता है.पुरानी यादों को ताज़ा कर देने वाली कृति.बधाई!

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    बस यादों की ही तो जुगाली थी… :-)

Rachna Varma के द्वारा
February 15, 2013

प्रेम और बसंत एक दूसरे के पूरक है प्रकृति ही मानो प्यार का आमन्त्रण दे रही हो बसंत का वर्णन का इतना सारगर्भित तरीके से करने के लिए बधाई !!

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    शुक्रिया… :-)

akraktale के द्वारा
February 14, 2013

आदरणीया अमिता जी सादर, सप्ताह की श्रेष्ठ ब्लोगर चुने जाने पर बधाई स्वीकारें. प्रस्तुत आलेख पढ सका तो अवश्य ही प्रतिक्रया दूंगा.सादर.

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    प्रतिक्रिया का ही इंतजार है

jlsingh के द्वारा
February 14, 2013

प्रेम और वसंत दोनों ही हमें जीवन के असली रूप के दर्शन करवाते हैं। …..शीत और ग्रीष्म का संधिकाल है वसंत… प्रेम और आल्हाद की पूर्वपीठिका। हवाओं की नशीली गंध, बौराया आम और महुआ के फूलों की महक से होश खोते मन की ऋतु है वसंत। आपने सबकुछ इस बसंत के अन्दर समाहित कर दिया! ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ की हार्दिक शुभकामना!

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    धन्यवाद

chaatak के द्वारा
February 14, 2013

बेहद खूबसूरत और दिल को रोमांचित कर देने वाली अभिव्यक्ति पर आपको हार्दिक बधाई!

shalinikaushik के द्वारा
February 14, 2013

bahut sundar v sarthak abhivyakti .

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    धन्यवाद….

tejwanig के द्वारा
February 14, 2013

अति सुंदर, आपको बधाई

    amita neerav के द्वारा
    February 15, 2013

    thanks :-)


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